शकुंतला एक्सप्रेस

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आपने डेक्कन क्वीन, राजधानी एक्स्प्रेस…ऐसे रेल के नाम जरुर सुने होंगे . लेकीन कभी आपने शंकुतला एक्स्प्रेस नाम सुना है? नाही ना!
शंकुतला एक्स्प्रेस यह सिर्फ एक रेल नही है. ये एक समाज से जुडी, रोजाना जिंदगीसे जुडी आम आदमी की पहचान है. महाराष्ट्र के अमरावती जिलेमे चलने वाली यह रेल आज बंद हो गयी है. लेकीन इसकी सांस्कृतिक और सामाजिक धरोहर पाठक को पुस्तक के माध्यमसे एक रेलसे जुडी हुई आस्था का दर्शन देती है…
नरपत सिंहजी जब २०१५ से २०१८ तक भुसावलमेंं कार्यरत थे तब उन्होंंने शंकुतला एक्स्प्रेस की अनेक बार यात्रा की. इस यात्राओंं के दरम्यान उन्होने जो देखा, जो समझा वह इस पुस्तक का रोचक और लुभावना रूप है…नरपत सिंह! राजस्थान के एक छोटेसे गांव से आये हुए ‘भारतीय रेल यातायात सेवा’ के अधिकारी. सन २०१५से वह महाराष्ट्र्मेंं अपना कर्तव्य निभा रहे हैंं… लेखक एक संवेदनशील अधिकारी तो है ही. इसके साथ उनकी भाषा सराहनीय है. राजस्थान का एक अधिकारी महाराष्ट्र्मे आता है, यहां के समाजसे इतना घुलमील जाता है, यह भी उल्लेखनीय है…
सुनिधी पब्लिशर्स को यह हिंदी पुस्तक प्रकाशित करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है. आप सभी इस रंगारंग सचित्र पुस्तक जरूर पढना चाहेंगे.

Weight 0.145 kg
Dimensions 14 × 21.5 cm

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